Bengaluru, 29 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि जो यह सोच रखता है कि इस्लाम भारत में नहीं रहेगा, वह व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता है.
Bengaluru जामा मस्जिद के चीफ इमाम मौलाना मकसूद इमरान ने समाचार एजेंसी से बातचीत में संघ प्रमुख के इस बयान का स्वागत किया. उन्होंने विभिन्न धर्मों की खूबसूरती पर प्रकाश डाला और कहा कि इस देश में विभिन्न प्रकार के धर्म हैं. सभी की अपनी खूबसूरती है. इस वजह से इस देश में हर धर्म से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात होती है.
उन्होंने कहा कि हम सभी की भलाई इसी में है कि हम लोग एक साथ मिलकर रहें, आपस में किसी का अहित न चाहें और एक-दूसरे को आगे बढ़ाने के बारे में सोचें. अगर हम ऐसा करेंगे, तो निश्चित तौर पर आगे बढ़ेंगे और हमारा मुल्क भी आगे बढ़ेगा. अगर हम इसी तरह से एक-दूसरे की टांग खींचते रहेंगे, तो इससे हमें दिक्कत होगी और हमारा मुल्क भी खोखला होता जाएगा. ऐसी स्थिति में हमारे लिए बेहतर रहेगा कि हम लोग सिर्फ एक-दूसरे के हित के बारे में सोचें. ऐसी स्थिति में आरएसएस प्रमुख का बयान स्वागतयोग्य है.
मौलाना ने कहा कि आज की तारीख में यहां पर जो मुस्लिम हैं, पहले उनके पास मौका था कि पाकिस्तान चले जाए, लेकिन उन्होंने हिंदुस्तान में रहने का फैसला किया. आज हमारे देश में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं. ऐसी स्थिति में हम सभी लोगों का फायदा इसी में है कि हम एक-दूसरे के हित के बारे में सोचे, ना कि बेकार के मुद्दों पर ध्यान दें.
उन्होंने कहा कि हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध सभी धर्मों के लोग रहते हैं. सभी लोग आपस में रहेंगे. निसंदेह सभी लोगों की पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हम रहेंगे एक ही साथ. हम सभी लोगों के बीच में एक तालमेल होना चाहिए.
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एसएचके/एएस
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